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दोहे

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हिंदी कक्षा 8 द्धितीय सत्र

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बिना सोचे कार्य करने से क्या होता है ?

सोचा-समजकर कार्य करना ही बुद्धिमान है | बिना सोचे समजे कार्य करने से कार्य बिगड़ जाता है | लोग तरह-तरह के ताने मारकर मजाक उड़ाते है | इस तरह दिना सोचे-समजे कार्य करनेवाले को उसका बुरा परिणाम भोगना पडता है |


तुलसीदास किसके घर नहीं झाना चाहते ? 

तुलसीदास अपनेआप की भावना को बहुत महत्व देते है | वे कहते है की जिस घर में लोग हमें आया हुआ देखकर हर्षा का अनुभव न करे, हमें देखकर जिनकी आँखों में स्नेह की चमक न पैदा हो, उस घर में भले सोना बरसता हो, फ़िर भी वे वहा जाना नहीं चाहते | 

कबीरा साईं से कितना माँगते है ?

कबीर संघ करना उचित नहीं मानते | वे भगवानसे उतना ही अन्न और धन मानगते है जितना उनके परिवार के निर्वाह के लिए आवश्यक है | उनके परिवार में कोई भूखा न रहे और दरवाजे पर आया हुआ कोई साधू-फ़क़ीर भी भूखा न जाए | कबीर इससे अधिक पाने की इच्छा नहीं करते |


रहीम बड़े लोगो की क्या विशेषता बनाते है ?

रहीम कहते है की बड़े लोग कभी अपने मुख से अपनी बड़ाई नहीं करते | वे कभी बड़े बोला नहीं बोलते | बड़ी-बड़ी बाते कर अपना बड़प्पन दिखाना उनके स्वभाव में नहीं होता | जैसे हीरा कीमती रत्न होता है, पर स्वयं अपनी कीमत नहीं बताता, उसी तरह बड़े लोग कूड़ा कभी अपनी प्रशसा नहीं करते | 

चंदन और भुजंग के उदाहरण द्धारा रहीम क्या कहते है ? 


रहीम मानते ही की उत्तम स्वभाववाला व्यक्ति बुरे लोगो के साथ रहे तो भी उनसे प्रभावित नहीं होता | चंदन के पेड़ पर साप लिपटे रहते है, परंतु चंदन में उन सांपो का विशा व्याप्त नहीं होता | सांपो के साथ रहकर भी चंदन उनके विशा से अछूता ही रहता है |

इस प्रकार चंदन और भुजंग के उदाहरण द्धारा रहीम कहते है की अगर व्यक्ति उत्तम कोटि का है तो वह संसार में रहकर यहाँ की बुराइयो से अलिप्त रहता है |