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हार की जीत

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हिंदी कक्षा 8 द्धितीय सत्र

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खड़गसिंह ईसा इलाके का ............. डाकू था |


कुख्यात 


अपनी वस्तु की प्रशंसा दुसरो के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय ....................... हो गया था | 

अधीर 

खड़कसिंह का ह्रदय-परिवर्तन क्यों हुआ ?

बाबा भआरती ने खड़गसिंह से प्राथना की थी की वह घोड़ा भले ही ले जहा, पर घोड़ा हथियाने की यह घटना किसीके सामने प्रकट न करे | जिस तरह छल-कपट करके उसने घोड़ा बाबासे छीना, उसे सुनकर लोग किसी गरीब पर विश्वास नहीं करेंगे |

बाबा भारती के ये शब्द डाकू खड़गसिंह के कानो में गुजते रहे | उसे लगा की बाबा आदमी नहीं, देखता है | उन्हें अपनी हानि की नहीं, गरीबो के नुकसान की चिता है | ऎसे उचे विचारोवाले पुरुष को धोखा देकर उसने अच्छा नहीं किया | उसे उनका घोड़ा लौटा देना चाहिए | इस प्रकार खड़गसिंह का हृदय परिवर्तन हुआ |


यदि आप बाबा भारती की जगह होते तो क्या करते ?

यदि बाबा भारती के जगह में होता तो थाने में जाकर यह शिकायत दर्ज कराता की डाकू खड़गसिंह से कुजे खतरा है | वह मुझे, धमकी दे गया है की वह मेरा घोड़ा मुजसे छेना ले जाएगा | उसकी धमकी के कारण में चौबीसो घंटे भयभीता रहता हु | पूरी रात भयभीता रहता हु | पूरी रात घोड़े की रखवाली में बीता जाती है | अपने बचाव का मेरे पास कोई उपाय नहीं है | वह किसी भी समय मेरे घोड़ा उठा ले सकता है |

मई थानेदार से बनती करता की वह इस सबंध में ठोस करवाई कर मुझे उस खतरनाख डाकू के भय से मुक्त करे |


"अब कोई गरीबो की सहायता से मुह नहीं मोड़ेगा | " ऐसा बाबा भारती ने क्यों कहा ? 

खड़गसिंह ने गरीब और अपाहिज बनाकर बाबा भारती को धोखा दिया था | उन्हें डॉ था की इस घटना का पता चलने पर लोग गरीबो, दीं-दू:कहियो और अपाहिजो पर विश्वास नहीं करेंगे | लेकिन खड़गसिंह  जिस शाम को बाबा भारती का घोड़ा ले गया, उसी रात को वह उसे बाबा के अस्तबल में बाँध गया था | अब खड़गसिंह  की धोखेबाजी की बात फ़ैलाने का डर नहीं था | इसलिए बाबा भारती ने कहा की अब गरीबो की सहायता से कोई मुह नहीं मोड़ेगा |