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ईदगाह

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हिन्दी कक्षा 8 प्रथम सत्र

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१. ऐतिहासिका गंथो में परोपकार के कई उदाहरण मिलते हे : (१) महर्षि दधीचि ने मानवकल्याण तथा असुरो के विनाश के लिए अपना शरीर त्याग दिया था | (२) राजा शिबि ने अपने अंग का दान देकर एक काबूतर के प्राण बचाए थे (३) महर्षि दयानडा ने विशा मिलाकर प्राण लेनेवाले रासोईए जगन्नाथ की जान धन देकर बचाई थी |

२. ऋषि-मुनियो ने हमें सीखा दी हे की नीराश्रीतो को आश्रय दो, दीन-दुखीयो और वृद्धो की शारीरिक तथा आर्थिक मदद करो, भूखो को भोजन कराओ और यदि आप विद्वान हो तो विद्याका प्रचार करो |

३. यदि सभी लोग अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार परोपकार करते रहे, तो देश और समाज की उन्नति होगी |

४, आश्रित x अनाश्रित, अवनति x उन्नति |

५. (१) भारतीय समाज में युगो से क्या प्रवाहित होती रही हे ? (परोपकार की गंगा),
   (२) सभी धर्मो का मूल क्या है ?
   (३) परोपकार के लिए लोग क्या-क्या करते है ?

६. उचित शीर्षक : परोपकार की महिमा |


बूढी अम्मा का क्रोध स्नेह में क्यों बदल गया ?

हामिद के चिमटा लाने पर अम्मा को दू:ख हुआ | उसे हामिद की नासमजी पर क्रोध भी आया | हामिद ने दादी से कहा की रोटिया पकाते समय तुम्हारी उगलिया जल जाती थी, इसलिए मै चिमटा लाया हु | यह सुनकर बूढी अम्मा का क्रोध स्नेह में बदल गया | हामिद के त्याग, सदभाव और विवेक पर वह न्योछावर हो गई |


हामिद ने चीमटा ही क्यों खरीदा ?

हामिद को लोहे की दूकान पर चिमटा देखकर ख़याल आया की दादी के पास चिमटा नहीं हैं | तवे से रोटिया उतारते समय उसकी उगलिया जल झाती हैं | चिमटा ले जाने पर वे जरूर प्रसन्न होंगी | चिमटा होने पर उसकी उंगलिया नहीं जलेगी और घर में एक काम की चीज भी हो जाएगी | खिलोने और मिठाईया खरीडकार चिमटा ही खरीदा |


चिमटा खरीदने के लिए क्रोध स्नेह में क्यों बदल गया ?

हामिद ने बड़े गरबा के साथ अपने साथियो को वताया की चिमटा सबसे बड़ा खिलौना हैं ! इसे कंधे पर रखे तो यह बदुक हो जाएगा | हाथ में लेने पर फकीरो का चिमटा हो जाएगा | चिमटे से मंजीरे का काम भी लिया जा सकता हैं | यदि वह एक चिमटा जमा दे तो सभी के खिलौना की जान निकल झाए | उसका चिमटा तो बहादुर शेरा हैं | वह आगा-पानी में, आंधी-तूफ़ान मै बराबर डटा रहेगा ! इस प्रकाार हामिद ने चिमटा खरीदने के पीछे कई कारण बताए और उसकी सर्वोपरिता सिद्ध की |



ईद की नमाज पढने के लिज गाव के लोग ईदगाह जाने की तैयारी करते हैं | इदर्गाह जाने का सबसे अधिक उत्साह लड़को मै हैं | हामिद उन्ही में से एक हैं | इदर्गाह में नमाजियों का मातृभाव देखते ही बनाता हैं | नमाज के बाद लड़के इदर्गाह के मेले में जाते हैं | मेले में बालको की विविध मनोवृत्ति के दर्शन होते हैं | कहानी के मुख्या पात्र हामिद के चरित्र की अनेक विशेषताए इदर्गाह के मेले में ही प्रगट होती हैं | इस प्रकार कहानी की मूख्य प्रवृतियों का केंद्र इदर्गाह होने से इस कहानी का शीर्षक 'इदर्गाह' रखा गया हैं |