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उठो धरा के अमर सपूतो

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हिन्दी कक्षा 8 प्रथम सत्र

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हिंदी

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कवि ने देश के सपूतो को क्या संदेशा दिया है ?

कवि देश के सपूतो से कहते है की देश स्वतत्र हो चुका है | अब तुम्हे देश का नवनिर्माण करना है | स्वतत्रता का लाभ जान-जान तक पहुचाना है | देशवासी तुमसे बड़ी-बड़ी आशाए रखते है | तुम उन्हें निराशा नहीं करना है | तुम्हे लोगो में नए प्राण फूकने है | विकास नए रास्ते खीझकर तुम्हे देश का पिछड़ापन दुयरा करना है |



हे मातृभूमि के पुत्रो, तुमने इस देश को स्वत^त्र करने के लिए बड़ा सघर्ष किया है  उर अत में मुमा विजयी हुआ हो | सचमुच, तुम भारतमाता के सपुता हो, लेकिन अभी तुम्हे बहुत करना है | युग-युग से पराधीनता में रहते-रहते यहाँ के देशवासियो के हृदयो में निराशा मरगई है | मुंहे इस निराशा को दुर कर इन्हे आशा बढ़ानी है | पराधीनता के दरम्यान वहा जो बरवादी हिऊ है, उसे दुर कर हर क्षेत्र में नया निर्माण करना है ?

हमारी राष्ट्रीय सपत्ति कौन-कौन सी है ? उसकी सुरक्षा के लिए आप क्या-क्या कर सकते है ?

रेलगाड़िया, रेलवे-स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्ग, नदिया, अभयारण्य, पुरातत्व सबधी सपत्ति आदि हमारी राष्ट्रीय सपति है |

राष्ट्रीय सपति की सुरक्ष हमारा कर्तव्य है | हम रेल सपत्ति को नुकसान नहीं पहुचने देंगे | राजमार्गो की मरम्मत के लिए सरकार को पत्र लिखिगे | हम लोगो को पानी का महत्व समाग़कर उसका अपव्यय रोकेंगे | सरकार द्वारा सरक्सिता इमारतों को नुकसान पहुँचते देखकर हम पुरातत्व विभाग को सुचिता करेंगे |


कवि नई मुस्कान कहा देखना चाहते है ?

दिलो के फूल स्वतंत्रा के प्रकाश में लिखते है | हमारा देश सदियों तक गुलामी के अंधेरे में रहा था | विदेशी साशक यहाँ के लोगो पर अत्याचार करते रहे | अन्याय और तरह-तरह का शोषण सहते-सहते लोग अपना स्वाभिमान खो बैठे | उनके दिलो में उदासी छा गई | कवि की इच्छा है की ऎसे मुर्दा दिलो में फ़िर से नए झीवन का सचार हो | इस प्रकार कवि युग-युग से लोगो के मुरझाए हुआ ह्रदयसुमानो पर नै मुस्कान देखना चाहते है |


कवि माहेश्वरीझी धारा के अमर सपूतो से क्या चाहते है ?

सदियों की गुलामी के बाद हमारे देश को स्वतंत्रता मिली है | कवि चाहते है की देश के युवक स्वतंत्रता के बाद देश का नवनिर्माण करे | वे लोगो के झीवन में नया उत्साह भरे, उनमे नए प्राणो का सचार करे | युग-युग के मुरझाए हुआ फूलो को नयी मुस्कान दे | अपनी मगलमय वाणी से ससारूपी उद्यान को गुंजित करे | वे तरह-तरह का ज्ञान प्राप्त करा देश का भविष्य उज्जवल बनाए | इस प्रकार कवि माहेश्वरीजी धारा के सपूतो से अनुका अपेक्साए रखते है |