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ममता

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हिन्दी कक्षा 8 प्रथम सत्र

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ममता की झोपड़ी में आश्रय मांगने कौन आया ?


चौसा युद्व में शेरशाह से विपणन होकर शहंशाह हुमायु आश्रय मांगने के लिए ममता की झोपड़ी में आया |


ममता को प्रत्येक लडनेवालो सैनिक से नफ़रत क्यों थी ?

विधर्मी शेरशाह से आततायी सैनिको ने पिता कआ वध किया था | उसी घटना के कारण ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफ़रत थी |


कहानी के आधार पर मुख्यपात्र ममता बे बारे में कहिए |

ममता एक विधवा ब्राह्मण युवती थी |लोभ उसे छू तक न गया था | उसने स्वर्ण रूपा में शेरशाह द्वारा दिया हुआ उत्केचा धुकरा दिया था | उसे ईश्वर, धर्म और हिन्दू जाती पर पूरा भरोसा था | ईश्वर की इच्छा के विरूद्व व्यवहार करना उसे पसंद नहीं था | वह गीता का पाधा करती थी | अतिथि को आश्रय देना वह अपना धर्म समझती थी | उसके उज्जवल चरित्र और स्नेहपूर्ण व्यवहार के कारण वह आसपास के गावो की स्त्रियों में लोकप्रिय बन गई थी |


प्रसादजी ने ईटो के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति किसे कहा ?

काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार था | उसे मौर्या और गुप्ता सम्राटो ने बनवाया था | वह उनकी कीर्ति का प्रतीका था, लेकिन अब वह खंडहर हो चुका था | उस भवन के शिखर खादिता हो चुके थे और अब वहा घास और झाड़िया उगा आई थी | फ़िर भी उन टूटी हुई दीवारो और ईंटो में भारतीय शिल्पकला की भव्य झलक देखी झा सकती थी | इसे ही प्रसादाझी ने 'ईंटो के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति कहा था |


शहंशाह हुमायु के आदेश का किस प्रकार पालन हुआ ? वह सही था या गलत ? अपने विचार स्पष्ट कीजिए |

शंहशाह हुमायु ने मुसीबत में ममता की झोपड़ी में आश्रय लिया था, इसलिए उसकी जगह पक्का घर बनवा देने का आदेश दिया था | हुमायु के बाद उसका बेटा अकबर शहंशाह बना | उनने उस झोपड़ी की जगह एक अष्टकोणीय मंदिर बनवाया | उस गगनचुंबी विशाल मंदिर में एक शिलालेख पर उसके निर्माता शहशाह अकबर और अपने पिता हुमायु का नाम अकित था | ममता का कही माना तक नहीं था |

पिआ का स्मारक बनवाकर अकबर ने सारा श्रेय कूड़ा लेना चाहा | दया की जिस देवी ममता ने उसके पिता को शरण दी थी, उसकी अकबर ने ज़रा भी परवाह नहीं की |