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सवाला बालमान के, जवाब डॉ. कलाम के

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हिन्दी कक्षा 8 प्रथम सत्र

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हिंदी

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यदि आप इन प्रश्नकर्ताओ मै होते तो आप कौन-कौन से प्रश्न पूछते ?

 

(१) देश में सब ससाधन सुलभ होने पर भी अभी तक हम विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में क्यों नहीं आए है ?

(२) हमारे देश में बरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती क्यों झा रही है ?

(३) कही-कही बहुमझिला मकान बन झाने पर अवैध बताया झाटा है | जब उसका निर्माण हो रहा था तब क्या वह अवैध नहीं था ?

(४) विदेशी बैंको में जमा काला धन भारत लाने में सरकार अक्षम क्यों है ?


अनुमान जगाओ की तुम २०२० में हो | अपने आसपास क्या देखा रहे हो ? अपने विचार प्रस्तुत कीजिए |

सन २०२० में मैं देखा रहा हु की चारो और हरियाली है | पिछले वर्षो में वृक्षारोपण की प्रवृति में टेकजी आने से यह सभव हुआ है | मेरे सामने की सड़क पर हरे-भरे पेड़ फुलो से लड़े हुए खड़े है | सड़क खूब चौड़ी और साफ़ सुथरी है | लोग चीजे खरीदने के लिए माल में झा रहे है | सडको पर रिक्शे काम हो गए है | कारो की संख्या बढ़ा गई है | इनमे भी छोटी कारो ज्यादा है | पेट्रोल पापा बहुत व्यस्त है | क्लायओवर पर वाहनो का रेला देखने में बहुत अच्छा लगाया है | लडकिया फर्राटे से दुपहिया वाहनो पर आ-झा रही है | नुक्कड़ पर कोई बेकार खड़ा हुआ नहीं शीखता | पहा दो होटल है | इस समय दोनों होटल खचाखच भरे हुए | एक होटल में एक रोबोट बैरे का कायम करा रहा है |


पढ़े हुआ से देखा हुआ ज्यादा याद रह झाटा है | क्यों ?

देखे हुए दृश्य का चित्र मस्तिष्क में ज्यो का त्यों अंकिता हो जाता है | पढने से केवल मन में काल्पनिक चित्र बनता है | कल्पना में वह सच्चाई नहीं होती जो यथार्थ में होती है | इसलिए पढ़े हुए से देखा डेरा तक याद रह झाटा है |


भाषा के विषय में डॉ.कलाम ने क्या बतया ?


डॉ.कलाम ने माध्यमिक शिक्षा की पढ़ाई मातृभाषा में की थी | कॉलेज और आगे की शिक्षा में उनकी पढ़ाई का माध्यम अग्रेजी भाषा थी | कलाम के विचार से कॉलेज की पढ़ाई भी मातृभाषा के माध्यम से होनी चाहिए | इसका कारण यह है की विधार्थी अपनी मातृभाषा में ही सोचता है | इसलिए मातृभाषा में ही अपनी बात आसानी से प्रकट कर सकता है | फ़िर भी विश्व के दूसरे देशो से संपर्क कायम करने के लिए वे अग्रेजी का ज्ञान आवश्यक मानते है ?


बचपन में हमें किस भाषा को प्रमुखता देनी चाहिए ? मातृभाषा को या अग्रेजी को ? क्यों ?

बचपन में हमें मातृभाषा को महत्व देना चाहिए |

मातृभाषा माँ की भाषा है | माता की गोद में हम उसी में सोचना विचरने की भाषा ही महारी अभिव्यक्ति की भाषा हो सकती है | मातृभाषा में हम अपने हृदय मन के भावो को सरल और प्रभावी ढंग से प्रकट कर सकते है | इसलिए बचपन में हमें मातृभाषा को ही महत्व देना चाहिए |

अग्रेजी विदेशी भाषा है | उसे पढने-सीखने में बहुत प्रयत्न करना पडता हे | उसमे प्रवीण होने पर भी अपने हृदय के भाव हम उसमे असरकारक ढग से प्रकट नहीं करा सकते | इसलिए अग्रेजी भाषा का स्थान नहीं ले सकती |