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राजनीतिक सिद्धांत के बारे में नीचे लिखे कौन-से कथन सही हैं और कौन-से गलत ?

A.

राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों पर चर्चा करते हैं जिनके आधार पर राजनीतिक संस्थाएँ बनती हैं।

B.

राजनीतिक सिद्धांत विभिन्न धर्मो के अंतर्सबंधों की व्याख्या करते हैं।

C.

ये समानता और स्वतंत्रता जैसी अवधारणाओं के अर्थ की व्याख्या करते हैं।

D.

ये राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की भविष्यवाणी करते हैं।


A. True
B. False
C. True
D. False

क्या एक अच्छा/प्रभावपूर्ण तर्क औरों को आपकी बात सुनने के लिए बाध्य कर सकता है ?


हाँ, यह बात सही हैं कि अच्छा एवं प्रभावपूर्ण तर्क औरों को आपकी बात सुनने के लिए बाध्य कर सकता है। जब हम किसी बहस या भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं तब हमारी अपनी राय होती है, कि क्या सही हैं या क्या गलत, हम इस ओर ध्यान नहीं देते कि क्या वे तर्कसंगत हैं या नहीं। तर्क के आधार पर कही गई बात को गलत साबित करना अत्यंत कठिन होता है।
जब एक व्यक्ति के पास आपकी बात को गलत प्रमाणित करने के लिए कोई तर्क नहीं होता तब वह उससे मानने के लिए विवश हो जाता हैं। राजनीतिक सिद्धांत का ज्ञान भी लोगो को तर्कसंगत बनाने में मदद करता हैं। यह व्यक्ति को न्याय और स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर व्यवस्थित रूप से सोचने और अपनी तर्क सिद्ध राय प्रस्तुत करने में सक्षम बनता हैं।


क्या राजनीतिक सिद्धांत पढ़ना, गणित पढ़ने के समान है ? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।


नहीं, गणित पढ़ना राजनीतिक सिद्धांत पढ़ने के सामान नहीं हैं। इसके पक्ष में निम्नलिखित कारण दिए जा रहे हैं:

  1. जहाँ गणित में त्रिभुज या वर्ग की सिर्फ एक परिभाषा होती है, वहाँ राजनीतिक सिद्धान्त में हमें समानता, आजादी या न्याय की अनेक परिभाषाएँ देखने को मिलती हैं।
  2. उदाहरण के लिए: जब हम पंक्तिबद्ध होते हैं या खेल के मैदान में होते हैं, हम समान अवसर चाहते हैं। जब हम किसी अक्षमता के शिकार होते हैं, तो हम चाहते हैं कि कुछ विशेष प्रावधान किए जाएँ। इस प्रकार हमारे सामने समानता की अनेक परिभाषाएँ आती है।
  3. गणित में, नियमों की परिभाषाएं एकल होती हैं। वही राजनीतिक सिद्धांतो में नियमों की परिभाषा संदर्भ के अनुसार अलग-अलग होती है।
  4. गणित द्वारा प्रतिबिंबित अवधारणाएँ स्थायी होती हैं और सूत्रों के माध्यम से व्युत्पन्न होती हैं जबकि राजनीतिक सिद्धांत की अवधारणाएं परिवर्तन-शील होती हैं और व्याख्या के लिए सदैव खुली रहती हैं।
  5. राजनीतिक सिद्धांत एक तथ्यात्मक कथन है जो कुछ तथ्यों पर आधारित होते है। उनमें सूत्रीय औचित्य होता है। तथ्य अंकों के समान गणतीय नहीं होते हैं।


लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। टिप्पणी कीजिए।


  1. शिक्षित और सचेत नागरिक राजनीति करने वालों को जनाभिमुख बना देते हैं। उदाहरण के तौर पर:
  2. यदि जागरूक नागरिक राजनेताओं को दल-बदल करते, झूठे वायदे और बढ़े-चढ़े दावे करते, विभिन्न तबकों से जोड़तोड़ करते, निजी या सामूहिक स्वार्थों में निष्ठुरता से रत और घृणित रूप में हिंसा पर उतारू होता देखते हैं तो वह विभिन्न सार्वजनिक मंच का प्रयोग करके उन्हें चुनौती दे सकते हैं।
  3. जागरूक नागरिक जब सरकार की नीतियों से असहमत होते हैं तो वह विरोध करते हैं और वर्तमान कानून को बदलने के लिए अथवा नए कानूनों और विनियमों को लागू करवाने के लिए अपनी सरकारों को राजी करने हेतु प्रदर्शन आयोजित करते हैं।
  4. सतर्क नागरिकों में सरकारी अधिकारियों और नेताओं की गलत नीतियों और उनके भ्रष्टाचार को जाँचने-परखने की क्षमता भली-भाँति होती हैं।
  5. जागरूक नागरिकता प्रजातंत्र की सफलता की पहली शर्त हैं। 


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राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हमारे लिए किन रूपों में उपयोगी है ? ऐसे चार तरीकों की पहचान करें जिनमें राजनीतिक सिद्धांत हमारे लिए उपयोगी हों।


राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक जीवन से सम्बन्धित अवधारणाओं और व्यापक अनुमानों का एक ऐसा ताना -बाना है जिसमें, शासन, राज्य और समाज की प्रकृति व लक्ष्यों और मनुष्यों की राजनीतिक क्षमताओं का विवरण शामिल है।

राजनीतिक सिद्धांत की उपयोगिता को निम्नलिखित उपयोगी बिंदुओं से स्पष्ट किया जाता हैं:

  1. राजनीतिक सिद्धांत शासन, उसके प्रकार और राजनीतिक जीवन को अनुप्राणित करने वाले स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे मूल्यों के बारे में सुव्यवस्थित रूप से विचार करता है।
  2. राजनीतिक सिद्धांत अतीत और वर्तमान के कुछ प्रमुख राजनीतिक चिंतकों को केंद्र में रखकर विभिन्न अवधारणाओं की मौजूदा परिभाषाओं को स्पष्ट करता है।
  3. राजनीतिक सिद्धांत विज्ञान के एक अनुशासन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक अनुशासन के रूप में राजनीतिक विज्ञान का भविष्य एक आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण पर निर्भर करता है।
  4. राजनीतिक सिद्धांत वास्तविकता को समझने में सहायता करते हैं। इसके द्वारा विद्यालय, दुकान, बस, ट्रैन या सरकारी कार्यालय जैसी दैनिक जीवन से जुड़ी संस्थाओं में स्वतंत्रता या समानता के विस्तार की वास्तविकता की परख की जाती हैं।

 


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