जीवन के महान मूल्यों के प्रति आस्था क्यों हिलने लगी है?

वर्तमान में समाज में ईमानदार और मेहनत करके अपना निर्वाह करने वाले को मूर्ख समझा जाता है। धोखा-धड़ी, झूठ और फरेब से काम करने वाले लोग फल-फूल रहे हैं। सच्चाई केवल डरपोक व कमजोर लोगों के लिए ही रह गई है। परिश्रमी, ईमानदार व सच बोलने वाले को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए जीवन के महान मूल्यों के प्रति हमारी आस्था कम हो गई है।
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चरम और परम किसे माना गया है?
  • जो ऊँचाई पर हो चरम, जो नीचे हो परम।
  • जो चाहत हो वह चरम, जो न चाहने वाला हो परम।
  • जो सबसे ऊँचा हो, अग्रणी हो वह चरम व जो सबसे प्रधान हो परम।
  • जो सबसे ऊँचा हो, अग्रणी हो वह चरम व जो सबसे प्रधान हो परम।

C.

जो सबसे ऊँचा हो, अग्रणी हो वह चरम व जो सबसे प्रधान हो परम।
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भारतवर्ष की क्या विशेषता रही है?
  • सच्चाई व ईमानदारी को गलत ठहराना।
  • भौतिक वस्तुओं की बजाय नैतिक मूल्यों को महत्व दिया जाता है।
  • भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना
  • भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना

B.

भौतिक वस्तुओं की बजाय नैतिक मूल्यों को महत्व दिया जाता है।
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कंडक्टर बस को छोड्कर साइकिल पर कहाँ गया?
  • डाकुओं को बुलाने।
  • एक खाली बस व छोटे बच्चों के लिए दूध आदि लेने।
  • लोगों से डर कर भाग गया।
  • लोगों से डर कर भाग गया।

B.

एक खाली बस व छोटे बच्चों के लिए दूध आदि लेने।
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‘क्या निराश हुआ जाए’ पाठ के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
  • लोग स्वार्थी हो गए हैं।
  • मानवीय भावनाएँ समाप्त हो रही हैं।
  • ईमानदार लोगों को मूर्ख समझा जाने लगा है।
  • ईमानदार लोगों को मूर्ख समझा जाने लगा है।

C.

ईमानदार लोगों को मूर्ख समझा जाने लगा है।
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लेखक की समाज के प्रति क्या सोच है?
  • समाज में अभी भी ईमानदारी है।
  • भ्रष्टाचार भी बढ़ता जा रहा है।
  • मानवीय भावनाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता।
  • मानवीय भावनाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता।

D.

मानवीय भावनाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता।
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