इस कविता से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

यह कविता पढ़कर हमें यह प्रेरणा मिलती है कि सभी प्राणियों को एक समान मानना चाहिए। जन्म को आधार मानकर किसी को अछूत कहना निन्दनीय अपराध हैं। किसी को निम्न जाति का मानकर मंदिर में प्रवेश न करने देना, मारपीट करना सरासर गलत है। मानव-मानव में भेद नहीं करना चाहिए। यदि हम ऐसा करते है तो यह सम्पूर्ण मानवता का अपमान करने के समान है।
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सुखिया का पिता किस सामाजिक बुराई का शिकार हुआ?

सुखिया का पिता छुआछूत की सामाजिक बुराई का शिकार हुआ। सुखिया के पिता को मंदिर के पुजारियों ने इसलिए पीटा क्योंकि वह अछूत होते हुए भी अपनी बीमार बेटी के कहने पर मंदिर का प्रसाद लेने आया था केवल इसी कलेश के कारण उसे पीटा भी गया तथा उसकी लड़की भी चल बसी।
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निम्नलिखित पंक्तिओं को पढ़कर उनका भाव पक्ष लिखिए:
उद्वेलिकत कर अश्रु-राशियाँ
हृदय- चिताएँ धधकार,
महा महामारी प्रचड़ं हो
फैल रही थी इधर-उधर।
क्षीण-कंठ मृतवत्साओं का
करुण रुदन दुर्दात नितांत
भरे हुए था निज कृश रव में
हाहाकार अपार अशांत ।

कवि महामारी के प्रचण्ड प्रकोप का वर्णन करते हुए कहता है कि चारों ओर महामारी फैली हुई थी। उसके कारण पीड़ित लोगों की आँखों से आँसुओं की झड़ियाँ उमड़ आई थी। उनके हृदय चिताओं की भाँति धधक उठे थे। अब लोग दुख के मारे बेचैन थें। अपने बच्चों को मरा हुआ देखकर माताओं के कंठ से अत्यन्त कमजोर स्वर में करुण रूदन निकल रहा था। वातावरण बहुत हृदय विदारक था। सब और अत्यधिक व्याकुल कर देने वाला हाहाकार मचा हुआ था। माताएँ कमज़ोर स्वर में रूदन मचा रही थी।
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मंदिर के सौन्दर्य का वर्णन अपने शब्दों में करो।

देवी माँ का मंदिर ऊँचे पहाड़ की चोटी पर स्थित था। वह आकार मे बहुत विशाल और विस्तृत था। सूरज की किरणों के प्रकाश में उसका सुनहरा कलश खिल उठता था। मंदिर का गिन सदा दीप और धूप के प्रकाश और सुगंध से महकता रहता था। मंदिर के भक्तजन मीठी आवाज में भक्ति भरे गीत गाते रहते थे। वहाँ नित्य देवी का गुणगान होता रहता था। इस प्रकार मंदिर का वातावरण उत्सव के समान उल्लासमय प्रतीत होता था।
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सुखिया ने अपने पिता से देवी के प्रसाद का एक फूल क्यों माँगा?


सुखिया महामारी की चपेट में आ गई। वह गंभीर रूप से बीमार रहने लगी। उसे अंदर-ही-अंदर यह अनुभव हो गया था कि उसकी मृत्यु नजदीक है। इसलिए वह मरते समय देवी की कृपा पाना चाहती थी। वह स्वयं तो देवी के मंदिर में जाने में असमर्थ थी। इसलिए उसके अपने पिता को देवी के प्रसाद का एक फूल लाने को कहा।
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