‘गीत-अगीत’ कविता में प्राकृतिक सौंदर्य व मानवीय प्रेम की अभिव्यक्ति किन भावों में की गई है? अपने शब्दों में लिखिए।

‘गीत-अगीत’ कविता में कवि ने प्राकृतिक सुषमा की अनुभूति का वर्णन किया है। नदियों के रूप में पेड़-पौधों का नैसर्गिक-सौंदय वर्णित किया गया है। दूसरी ओर पशु-पक्षियों के माध्यम से ऐसे गीत का समाँ बाँधा गया है जो प्रेम का आभास कराता है। मनुष्य भी गीत की राग-अनुभूति द्वारा प्रेम-व्यवहार करता है। गीत ऐसी शैली है जो दूसरों के मन को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है।
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के उत्तर दीजिये:
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जंग को गीत सुनाता!”

गा-गाकर बह रही निर्झरी,
पाटक मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गुलाब क्या सोचता है?


  • अपनी कहानी सुनाने की
  • वाणी न होने का कारण
  • पतझड़ के सपनों का गीत सुनाने की
  • पतझड़ के सपनों का गीत सुनाने की

C.

पतझड़ के सपनों का गीत सुनाने की
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के उत्तर दीजिये:
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जंग को गीत सुनाता!”

गा-गाकर बह रही निर्झरी,
पाटक मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?

गीत से तात्पर्य है-
  • सस्वर गाना
  • मन में गाना
  • धीरे से गाना
  • धीरे से गाना

A.

सस्वर गाना
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के उत्तर दीजिये:
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जंग को गीत सुनाता!”

गा-गाकर बह रही निर्झरी,
पाटक मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
नदी के गीत को क्या नाम दिया गया है?


  • प्रेम
  • प्रसन्नता
  • उल्लास
  • उल्लास

D.

उल्लास
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के उत्तर दीजिये:
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जंग को गीत सुनाता!”

गा-गाकर बह रही निर्झरी,
पाटक मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
विरहिणी के गीतों को कौन सुनता है?


  • पत्थर 
  • किनारे
  • नदी का तल
  • नदी का तल

B.

किनारे
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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के उत्तर दीजिये:
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता,
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जंग को गीत सुनाता!”

गा-गाकर बह रही निर्झरी,
पाटक मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुदंर है?
तटिनी गीत गाती है?


  • विरह 
  • प्रेम
  • श्रृंगार
  • श्रृंगार

A.

विरह 
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