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निन्नलिखित प्रशनों के उत्तर दीजिए-
प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की’ क्या इच्छा होती है?

जब प्रेमी प्रेम के गीत गाता है तब उसकी प्रेमिका घर छोड़कर उसके पास चली आती है। वह नीम की छाया में छिपकर उसका मधुर गीत सुनती है। तब उसकी यह इच्छा होती है कि वह भी उसके गीत की पंक्ति बन जाए। वह उस पंक्ति में डूबकर खो जाती है और उसको गुनगुनाना शुरु कर देती है।
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निन्नलिखित प्रशनों के उत्तर दीजिए-
प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के सबंध की व्याख्या कीजिए।

प्रकृति की सुंदरता पशु-पक्षियों को भी गुनगुनाने तथा चहचहाने के लिए आकुल कर देती है। दोनों अर्थात् नर और मादा में प्रेम उमड़ने लगता है। उनके क्रिया-कलाप प्रकृति के सौंदर्य के प्रेम में विलीन हो जाते हैं।
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निन्नलिखित प्रशनों के उत्तर दीजिए-
जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?

शुक अपना स्नेह प्रकट करने के लिए मधुर गीत गाता है तब उसका गीत पूरे वन में गूँज जाता है, शुकी के हृदय पर यह प्रभाव पड़ता है कि उस गीत की लहरें हृदय को छू जाती है और वह स्नेह में ही सुनकर रह जाता है उन्हें स्वर नही मिल पाता। शुक का गीत सुनकर शुकी के पंख खुशी से फूल जाते हैं। वह अत्यधिक प्रसन्न होती है।
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निन्नलिखित प्रशनों के उत्तर दीजिए-
प्रथम छदं में वर्णित प्रकृति-चित्रण को लिखिए।

प्रकृति का चित्रण करते हुए कवि बताता है कि वन के सुनसान वातावरण में नदी तीव्र गति से बहती चली जा रही है। ऐसा लगता है कि वह अपनी व्यथा अपने किनारों से कह रही है और अपना दिल हल्का कर रही है। तट पर एक गुलाब का पौधा है जो किसी सोच-विचार में मग्न है। पास में नदी बह रही है। इसके किनारे पर गुलाब चुपचाप खड़ा हुआ है। फिर प्रकृति के साथ पशु-पक्षी का गहरा संबंध है। उनका जीवन प्रकृति पर निर्भर होता है और प्रकृति से ही उन्हें भोजन मिलता है तथा प्रकृति ही उन्हें सहारा देती है। ये प्रकृति में अपना घोंसला (निवास स्थान) बनाते हैं।
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निन्नलिखित प्रशनों के उत्तर दीजिए-
नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे सम्बन्धित पंक्तियों को लिखिए।


इससे सम्बन्धित पंक्तियाँ इस प्रकार है-
तट पर एक गुलाब सोचता
“देते स्वर यदि मुझे विधाता
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।”

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