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निम्नलिखत प्रशनों के उत्तर दीजिए-
आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।

प्रत्येक आदमी में विभिन्न प्रवृत्तियाँ होती हैं। आदमी स्वभाव से अच्छा भी है और बुरा भी है। वह दूसरों के दु:खों का कारण है तो वही उन दु:खों का निवारण करने वाला भी है। आदमी ही आदमी पर शासन करता है; आदेश देता है और मनचाहे ढंग से परेशान करता है। आदमी दीन-हीन है और आदमी संपन्न भी है। कोई कुर्बानी देने में विश्वास रखता है कोई दूसरों के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने को तत्पर रहता है तो कोई दूसरें की जान लेने में विश्वास रखता है।
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निम्नलिखत प्रशनों के उत्तर दीजिए-
चारों छदं में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन-किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण किया है वे रूप इस प्रकार हैं:
सकारात्मक                         नकारात्मक
बादशाह                            दीन-दरिद्र
मालदार                             कमज़ोर
स्वादिष्ट भोजन खाता इन्सान       सूखी रोटियाँ खाता इन्सान
चोर पर निगाह करने वाला         जूतियाँ चुराने वाला
जान न्यौछावर करने वाला          जान लेने वाला
सहायता करने वाला                अपमान करने वाला
शरीफ़ लोग                         कमीने लोग
अच्छे लोग                           बुरे लोग।

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निम्नलिखत प्रशनों के उत्तर दीजिए-
‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति क्या धारणा बनती हैं?

‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता को पढ़कर’ हमारे मन में मनुष्य के प्रति यही छवि बनती है कि संसार में अनेक प्रकार के अच्छे व बुरे दोनों तरह के कार्य करने वाले होते हैं। मनुष्य परिस्थितियों और भाग्य का दास होता है। उसकी परिस्थितियाँ ही उसे बादशाह बनाती हैं या फकीर बना देती हैं। मनुष्य शैतान भी है और फरिश्ते भी, धनी भी और निर्धन भी, अच्छे भी और बुरे भी; साधु भी और चोर भी, गुरू भी, शिष्य भी, कुर्बानी देने वाले भी और कुर्बानी लेने वाला मनुष्य भी इस संसार में है। मनुष्यों की इस विषमता के कारण ही संसार में पाप भी है और पुण्य भी। धर्म भी है और अधर्म भी।
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निम्नलिखत प्रशनों के उत्तर दीजिए-
इस कविता का कौन-सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?

इस कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ मुझे अच्छी लगी हैं
‘अच्छा भी आदमी ही कहाता है ए नजीर
और सबमें जो बुरा है सो है वो भी आदमीं’
यह पंक्तियाँ मुझे इसलिए अच्छी लगी हैं क्योंकि इन पंक्तियों से यह प्रेरणा मिलती है कि हमें सद्‌गुणों को अपना कर अच्छा आदमी बनना है। हमें बुराईयों का त्याग कर देना चाहिए। बुराइयाँ व्यक्ति को बुरा आदमी बना जाती है। समाज में अच्छे आदमी का ही आदर होता है, बुरे का नहीं।

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निम्नलिखत प्रशनों के उत्तर दीजिए-
पहले छदं में कवि की दृष्टि आदमी के किन-किन रूपों का बखान करती है? क्रम से लिखिए।


पहले छंद में कवि की दृष्टि मानव के निम्नलिखित रूपों का बखान करती है:
बादशाह, गरीब व दरिद्र, मालदार, एकदम कमजोर मनुष्य का, स्वादिष्ट भोजन करने वाले का, सूखी रोटियाँ चबाने वाले मनुष्य का।

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