Press "Enter" to skip to content

अविद्यः पुरुषः शोच्यः शोच्यं मिथुनमप्रजं । निराहारः प्रजाः शोच्या शोच्यं राष्ट्रमराजकं ॥

Pankaj Patel 0
अविद्यः पुरुषः शोच्यः  शोच्यं मिथुनमप्रजं । निराहारः प्रजाः शोच्या शोच्यं राष्ट्रमराजकं ॥

अविद्यः पुरुषः शोच्यः शोच्यं मिथुनमप्रजं ।
निराहारः प्रजाः शोच्या शोच्यं राष्ट्रमराजकं ॥

भावार्थ:

विद्या विहीन (मूर्ख) व्यक्ति और सन्तानहीन दंपति शोचनीय हैं। इसी प्रकार वह प्रजा शोचनीय है जिसे भरपेट भोजन उपलब्ध नहीं होता है, और वह राष्ट्र शोचनीय है जहां सर्वत्र अराजकता व्याप्त है।

English

Avidyah purushah shochyah shochyam mithunamaprajam.
Niraaharhh prajaah shochyaa shochyam raashtramaraajakam.

A person who is foolish and uneducated is to be deplored and so also a childless couple, citizens of a Country who always face shortage of food and are not able to feed themselves properly. An anarchic Nation is also most unfortunate and deplorable.

(इससे पहले का सुभाषित – अहो प्रकृतिसादृश्यं श्लेष्मणो दुर्जनस्य च । मधुरैः कोपमायाति कटुकेनैव शाम्यते ॥ )

Leave a Reply

Your email address will not be published.