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आपदर्थे धनं रक्षेद्वारन्रक्षेद्धनैरपि । आत्मानं सततं रक्षेद्वारैरपि धनैरपि ॥

Pankaj Patel 0
आपदर्थे धनं रक्षेद्वारन्रक्षेद्धनैरपि । आत्मानं सततं रक्षेद्वारैरपि धनैरपि ॥

आपदर्थे धनं रक्षेद्वारन्रक्षेद्धनैरपि ।
आत्मानं सततं रक्षेद्वारैरपि धनैरपि ॥

भावार्थ:

एक बुद्धिमान् व्यक्ति को अचानक उपस्थित होने वाली आपदाओं से सुरक्षा हेतु धन संपत्ति बचा कर रख्रनी चाहिये तथा अपने घर के द्वार की रक्षा का भी प्रबन्ध करना चाहिये। परन्तु अपनी स्वयं की सुरक्षा सदैव धन संपत्ति और भवन की सुरक्षा से भी अधिक करनी चाहिये।

English

Aapadarthe dhanam rakshedvaaranraksheddhanairapi.
Aatmaanam satatam rakshedvaarairapi dhanairapi.

A wise person should save money as a protection against some misfortune or a contingency and also ensure proper protection of the entrance of his house. However, he should ensure continuous protection to himself even more than his house and his wealth.

(इससे पहले का सुभाषित – अपुत्रत्वं भवच्छ्रेयो न तु स्याद्विगुणः सुतः । जीवन्नप्यविनीतोSसौ मृत एव न संशयः ॥ )

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