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पात्रं न तापयति नैव मलं प्रसूते स्नेहं न संहरति नैव गुणान् क्षिणोति । द्रव्याSवसानसमये चलतां न धत्ते सत्पुत्र एव कुलसद्मनि कॊSपि दीपः ॥

Pankaj Patel 0
पात्रं न तापयति नैव मलं प्रसूते स्नेहं न संहरति नैव गुणान् क्षिणोति । द्रव्याSवसानसमये चलतां न धत्ते सत्पुत्र एव कुलसद्मनि कॊSपि दीपः ॥

पात्रं न तापयति नैव मलं प्रसूते
स्नेहं न संहरति नैव गुणान् क्षिणोति ।
द्रव्याSवसानसमये चलतां न धत्ते
सत्पुत्र एव कुलसद्मनि कॊSपि दीपः ॥

भावार्थ :

एक सत्पुत्र एक दीपक के समान अपने कुल और निवास को प्रकाशित करता है, परन्तु एक दीपक के समान वह सुपात्र व्यक्तियों को तापित नहीं करता है और न किसी प्रकार की गन्दगी करता है, न स्नेह पूर्ण व्यवहार तथा गुणों का परित्याग करता है, न धनसंपत्ति के नष्ट होने पर अपने चित्त को भ्रमित होने देता है। (दीपक के जलने पर दिया गरम हो जाता है और कालिख छोडता है, तेल को चूस लेता है और तेल के समाप्त होते समय उस की लौ कांपने लगती है | )

(इस सुभाषित में एक सत्पुत्र की तुलना एक दीपक से की गयी है और उसे “कुलदीपक” नाम दिया गया है जो अपने सद्गुणों से अपने कुल को एक दीपक के समान प्रकाशित करता है। परन्तु दीपक मे जो अवगुण हैं वे एक ‘कुलदीपक’ में नहीं होते हैं, जिनका वर्णन इस सुभाषित में किया गया है। पात्र, ताप, मल, स्नेह, गुण, द्रव्य चलता। इन सभी शब्दों के दो अर्थ हैं, जिनका कौशल पूर्वक उपयोग इस श्लोक में किया गया है।)

English

Paatrm na taapayati naiva malam prasoote.
Snehm na samharati naiva gunaan kshinoti
Druvyaavasaanasamaye chalataam na dhatte.
Satputra eva kulasadmani kopi deepah.

Unlike an oil lamp a “Kuladeepak” does not heat up (cool headed), does not produce any impurities, does not destroy love and virtue like the oil sucked by the lamp’s wick, and does not become shaky and frightened at losing his wealth like the flickering flame when the oil in the lamp is about to cease. Really, a virtuous son brings glory and fame to his family and household like a bright lamp but without the shortcomings of the lamp.

(In this Subhashita a virtuous son has been compared to a lamp which brightens a household and has been metaphorically called a “Kuladeepak” i.e. is a son who brings name and fame to his family just like a lamp brightening a household. However the drawbacks of the oil lamp, like consuming oil, bringing out lamp soot, etc, are not present in the “Kuladseepak”..i.e unlike an oil lamp a “Kuladeepak” does not heats up, does not produce impurities, does not destroys love like the oil consumed by the lamp. The words Paatra. Sneha. Guna, Druvya, Chalataa, each of them have two meanings, one applicable to the lamp and the other to a virtuous son. Which have been very skillfully used to underline the qualities of a virtuous son.)

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