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ल्यूइस ब्राउन – दुनिया की पहली टेस्ट-ट्यूब (IVF) बेबी

Pankaj Patel 0
ल्यूइस ब्राउन

लंदन, इंग्लैंड का ओल्डहैम जनरल हॉस्पिटल। अस्पताल के बाहर फोटोग्राफर्स और पत्रकारों की भीड़। अस्पताल के कॉरिडोर में भारी पुलिस बल। दरअसल यहां उस बच्ची का जन्म होने वाला था, जिसे बाद में ‘बेबी ऑफ द सेंचुरी’ कहा गया। दिन था- 25 जुलाई 1978। इस दिन दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुइस जॉय ब्राउन का जन्म हुआ था। जन्म होते ही उनकी 60 से ज्यादा जांचें की गईं, ताकि यह पता चल सके कि वह सामान्य बच्चों जैसी ही हैं। अपनी ऑटोबायोग्राफी में लुईस के अनुसार, लोग उस समय उनके माता-पिता को हजारों पत्र भेजते थे, जिसमें अधिकांश नफरत भरे होते थे। लुईस ने एक बार बताया था कि एक बार उन्हें एक ऐसा पत्र मिला जो खून में सना था। उस समय के धार्मिक नेता और अधिकांश लोग इसे गलत और अप्राकृतिक मानते थे।

आईवीएफ को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In vitro fertilisation) कहते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा पति-पत्नी अपना बच्चा आर्टिफिशियल तरीके से पैदा कर सकते हैं। इस प्रॉसेस में सबसे पहले अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से अंडो को निकाल कर प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार मेल या पुरुष के शुक्राणुओं के साथ मिलाकर निषेचन(Fertilization) के लिए रख दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है।

लैब में इसे दो या तीन दिन के लिए रखा जाता है, फिर पूरी जांच के बाद इससे बने भ्रूण को वापिस महिला के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता है। आईवीएफ की इस प्रक्रिया में दो से तीन हफ्ते का समय लग जाता है। बच्चेदानी में भ्रूण इम्प्लांट करने के बाद 14 दिनों में ब्लड या प्रेग्नेंसी टेस्ट के जरिए इसकी सफलता और असफलता का पता चलता है।

आईवीएफ को लेकर लोगों के बीच में आज भी कई भ्रांतियां फैली हुई हैं जो कि सभी बेबुनियाद हैं। आईवीएफ से पैदा हुए बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ्य होते हैं। विज्ञान की अनेक खोज की तरह IVF तकनीक भी मानव समाज की भलाई के लिए खोजी गई थी, और इससे समाज का फायदा ही है।

नफरत भरे संदेशों के कारण मां ल्यूइस ब्राउन को बाहर नहीं ले जाती थीं। लुइस बताती हैं कि एक बार उन्हें किसी ने टूटी हुई टेस्ट ट्यूब भेजी थी। उन्हें कई धमकी भरे पत्र भी भेजे गए। लोगों ने प्लास्टिक के भ्रूण तक भेजे। वे बताती हैं कि एक बार एक पार्सल आया, जिस पर केवल लुइस ब्राउन, टेस्ट ट्यूब बेबी, ब्रिस्टल, इंग्लैंड लिखा हुआ था। इसे सैन फ्रैंसिस्को से भेजा गया था। इसे मां ने खोला। इसके अंदर एक छोटा बॉक्स था, जिसके अंदर लाल रंग से सना हुआ एक कागज का टुकड़ा था, जिसके साथ टेस्ट ट्यूब बेबी वॉरेंटी कार्ड लिखा हुआ एक और कार्ड था। एक अन्य बुकलेट भी भेजी गई थी, जिसमें सुझाव दिया गया था कि टेस्ट ट्यूब बेबी को टॉयलेट बाउल या फिश टैंक में भी रख सकती हैं। वे कहती हैं कि ऐसे नफरत भरे संदेशों के कारण मेरी मां लेस्ली मुझे कहीं बाहर ले जाने में भी डरती थीं।

जब उनसे पूछा गया- तुम आखिर एक टेस्ट ट्यूब में आई कैसे? तब उन्होने बताया था की ; वहीं, करीब 9 साल तक मां न बन पाने के कारण लेस्ली के लिए यह तकनीक एक वरदान थी। ल्यूइस ब्राउन कहती हैं कि हर महिला को मां बनने का अधिकार है, उसके लिए ऐसी तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। लुइस की छोटी बहन नताली ब्राउन भी टेस्ट ट्यूब बेबी हैं। उनका जन्म ल्यूइस ब्राउन से चार साल बाद हुआ था। मई 1999 में नताली जब खुद मां बनीं तो वो दुनिया की पहली ऐसी महिला रहीं जो खुद तो आईवीएफ से जन्मी, लेकिन उनका बच्चा सामान्य तरह से हुआ। शुरुआत में स्कूल में लुइस को काफी ताने सहने पड़ने थे, एक बार स्कूल में उनसे किसी ने पूछा कि तुम आखिर एक टेस्ट ट्यूब में आई कैसे? हालांकि, लुइस आज अपने दोनों बच्चों के साथ खुश हैं और जगह-जगह पर साक्षात्कार और लेखों के जरिए लोगों को इसके लिए जागरूक कर रही हैं। आज लुइस एक शिपिंग ऑफिस में काम करती हैं। उनके दो बेटे हैं, दोनों का ही जन्म सामान्य है। ल्यूइस ब्राउन ने साल 2004 में नाइट क्लब के बाउंसर वेस्ले मुलिंडर से शादी की थी।

लेकिन ये तो सच है कि ल्यूइस ब्राउन एक समय तक सेलिब्रिटी की तरह थीं और जब वो ये सुनती थीं कि वे दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हैं तो उन्हें आज भी काफी अच्छा लगता है। लुईस ने आगे बताया कि कुछ लोग उन्हे अजीब नजरों से भी देखते थें क्योंकि लोग उन्हें अजीब समझते थें।

लुईस बताती हैं कि उनकी जिंदगी का आधा समय दुनिया को ये समझाते हुए ही निकल गया कि वो भी एक आम बच्ची या सामान्य इंसान हैं। लुईस ने जिंदगी के ऐसे ही और अनुभवों पर किताब भी लिखी है. इसका नाम है ‘माय लाइफ एज द वर्ल्ड्स फर्स्ट टेस्ट ट्यूब बेबी’।

लुइस के जन्म के बाद से आज तक दुनिया में 80 लाख टेस्ट ट्यूब बेबी जन्म ले चुके हैं। वर्तमान में करीब 5 लाख बच्चे प्रतिवर्ष दुनिया में इस तकनीक से जन्म लेते हैं। भारत में 6 अगस्त 1986 को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हर्षा चावड़ा का जन्म हुआ था। उन्होंने दो साल पहले एक बेटे को जन्म दिया है।

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