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ईंटरनेट से आतंक – बड़ी समस्या

Pankaj Patel 0

अपने देश मेंं गत 2-3 सालो से सहिष्णुता-असहिष्णुता के बारे मेंं लोगो मे और खासकर मीडिया मेंं बडी चर्चा चली है। आजादी के नारे लगाना देशद्रोह समान गीना जाने लगा है। कही पर आरक्षण की मांग करना देशद्रोह बन जाता है। कही पर ISIS के झंडे लहेराना सामान्य अपराध मात्र है, और इसके लिए लोग गिरफ्तार भी नही होते। देश की व्यवस्था, अखंडता, एकता के लिए हानिकारक जो भी हो, सख्ती से निपटना चाहिए। हमारे देश मेंं मीडिया की आजादी ठीकठाक है। प्रिंट और ईलेक्ट्रोनिक मीडिया मेंं अपने पर नजर रखने हेतु Editors Grid जैसी कुछ संस्थाओ की स्थापना हुइ है, जो खुद अपने पर नियंत्रण रखते है। आज-कल ईंटरनेट और सोशियल मीडिया न सिर्फ जानकारी बढाने हेतु पर अपनी बात लोगो मेंं फैलाने हेतु भी बडा प्रभावशाली माध्यम है। बोलने की आजादी हमारा मौलिक अधिकार है पर सामाजिक समरसता की किमत पर नहीं।

दुनिया मेंं विकसित देश अपने यहा Freedom Of Speech के बारे मेंं जाने जाते है। आज-कल आतंकवाद के खतरे से दुनिया मेंं कोई मूल्क आजाद नहि। ऐसे मेंं विकसित देश भी सोशियल मीडिया से आतंकवाद के फैलाव और आतंकवादी संगठनो के आर्थिक सशक्तीकरण मे सोशियल मीडिया के दुरुपयोग से चिंतित है। हर वैज्ञानिक शोध के अच्छे और बूरे दोनो प्रकार के उपयोग संभवित है, ये बात ईंटरनेट को भी लागु होती है। अभी-अभी ईंटरनेट के 25 साल पूरे हुए है। नेट से दुनिया छोटी हो गई है, दुनिया के किसी भी कोने मेंं तुरंत संपर्क करने हेतु ईंटरनेट बडा उपयोगी माध्यम साबित हुआ है। जानकारी झुटाने, आकस्मिक संजोगो मेंं तत्काल रीस्पोंस के लिए और ज्ञान वृद्धि मे इसका कोई मुकाबला नहि। फिर भी आतंकी संगठनो और उनके जैसे असमाजिक तत्वो द्वारा उसके दुरुपयोग को नजर अंदाज नहि किया जा सकता।

अभी हाल ही मेंं ब्रीटेन की गृह मंत्रालय की प्रवर समितिने एक रीपोर्ट सरकार को दी है, जिसकी दुनिया भर मेंं बडी चर्चा है। ईस रीपोर्ट से पता चलता है की बीना नियंत्रण के सोशियल मीडिया कंपनीया आतंकवाद के विस्तार और आतंकवादी संगठनो के धन जुटाने का माध्यम बन गई है। विकसित देशो में सोशियल मीडिया पर नजर रखने हेतु प्रशिक्षित ऐजंसीया और जरूरी आधारभूत ढांचा होते हुए भी उसके दुरुपयोग को रोकने मेंं लाचार है। ब्रीटीश प्रवर समिति की उसी रीपोर्ट से पता चलता है की सोशियल मीडिया कंपनीया अपने व्यवसाय के सामने दुनिया भर की चिंता का प्रमुख विषय बने आतंकी संगठनो के व्याप को रोकने मेंं कम रुचि दिखा रही है। अभी तक ये कंपनीया अपने प्लेटफोर्म पर असामाजिक प्रवृत्तिया रोकने के लिए खुद जिम्मेदार है और निर्णायक भी है। पर अब सोशियल मीडिया पर नियंत्रण की चर्चा पूरी दुनिया मेंं चल रही है।

हमारे देश की बात करे तो कुछ समय पहेले सुप्रीम कोर्ट मेंं दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पोर्न साईट्स को रोकने मेंं अपनी असमर्थता जाहिर की थी, जिसके लिए आधारभूत ढांचे की कमी और कुछ निती एवम प्रवर्तमान कानूनो का हवाला दिया गया था। अब अगर सोशियल मीडिया पर नियंत्रण करना है तो हमारे पास न ऐजंसीया है ना ही आधारभूत संरचना है। सोशियल मीडिया पर नियंत्रण का अर्थ कोई ये न समजे की बोलने की आजादी रोकने की बात है, क्युंकी आतंकवाद का फैलाव कीसी के लिए भी अभीव्यक्ति स्वतंत्रता नही हो सकती। आज-कल हम डीजिटल ईंडिया की बाते कर रहे है पर वास्तविकता विपरित है। कही पर ईंटरनेट की पहोच नही है तो ईंटरनेट पर निगरानी रखने की सरकारकी पहोच नही है।

पिछले दिनो फ्रांस, बॅल्जियम जैसे युरोपीय देशो मे हुए आतंकवादी हमले, मध्य-पूर्व मे विस्फोटक स्थिति और हमारे नजदिक बांग्लादेश मे आतंकी हमलेने भी  हमे निंद से नही जगाया तो अब पठानकोट और उरी के हमलो से हमे जाग जाना चाहिए, वरना देश का भविष्य अंधकारमय होगा। भारत मेंं भी ISIS के समर्थक या उसके लिए युवाओ की भरती करने वाले लोग कम मात्रा मेंं ही सही पकडे गए है। ये सभी ईंटरनेट और सोशियल मीडिया से अपनी प्रवृत्तिया चला रहे थे। कुछ सालो से हमारे देश मेंं जब भी कोई बडी घटना होती है तो मोबाईल ईंटरनेट तुरंत बंध कर दिया जाता है। उत्तर-पूर्व के लोगो पर कथित हमलो के समय, हरियाणा और गुजरात मेंं आरक्षण आंदोलन के समय और अभी कश्मिर मे यही हुआ है। ईंटरनेट को बंध कर देना किसी समस्या को तत्कालिन रोकने के लिए अस्थायी रूप से उपयोगी हो सकता है पर इसके विपरित परिणाम व्यापार और ईंटरनेट बॅन्किंग जैसी सेवाओ पर हो सकते है।

ईंटरनेट, सोशियल मीडिया या इनके जैसे नवीन वैज्ञानिक संशोधनो का दुरुपयोग रोकने हेतु समयबद्ध व्यवस्थातंत्र विकसित करना अनिवार्य है। अभी-अभी सबमरिन निर्माण की बहोत सी गुप्त जानकारी सार्वजनिक हो गई है। हो सकता है ये जानकारी हेकिंग से चुराई गई हो। अंत मेंं कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना ही है की इन मामलो मेंं सिर्फ बाते करने से कुछ होने वाला नही है। ठोस कदम उठाने का समय आ गया है, जवाबदार ऐजंसीया और सरकारे सिर्फ अपने देश मेंं नहि पर दुनियाभर मे जितनी जल्दी इन मामलो मे कदम उठायेंगी उतना ही बहेतर है।

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