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कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ । कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

Pankaj Patel 0
कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।  कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।
कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

भावार्थ:

कैसा समय (परिस्थिति) है, कौन मेरे मित्र हैं, में किस देश में हूं, मेरी आय और तदनुसार व्यय कितना है, में कौन हूं और मुझ में कितनी शक्ति है, इन विषयों पर बारम्बार विचार करना करना चाहिये। (और तदनुसार आचरण करना चाहिये )

English

Kaha kalah kaani mitrani ko deshah kau vyayaagamau.
kaschaham ka cha me shaktiriti chintyam muhurmuhu.

One should always and repeatedly ponder over as to what are the prevailing circumstances, who are my friends, in which country I am, what is my income and expenditure, who am I and what is my ability and strength ( before undertaking any task and then take the appropriate action)..

(इससे पहले का सुभाषित – एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन वह्निना । दह्यते तद्वनं सर्वं दुष्पुत्रेण कुलं यथा ॥ )

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