Press "Enter" to skip to content

अविद्यानाशिनी विद्या भावना भय नाशिनी । दारिद्र्य नाशनं दानं शीलं दुर्गति नाशनं ॥

Pankaj Patel 0
अविद्यानाशिनी विद्या भावना भय नाशिनी ।  दारिद्र्य नाशनं दानं शीलं दुर्गति नाशनं ॥

अविद्यानाशिनी विद्या भावना भय नाशिनी ।
दारिद्र्य नाशनं दानं शीलं दुर्गति नाशनं ॥

भावार्थ:

विद्या प्राप्ति से अज्ञान का नाश होता है तथा स्वयं पर दृढ विश्वास से भय दूर होता है। धन संपत्ति का दान निर्धन और सुपात्र व्यक्तियों को करने से समाज से गरीबी दूर हो जाती है और शीलवान व्यक्ति की दुर्गति नहीं होती है।

English

Avidyaanaashinee vidyaa bhavanaa bhaya naashinee.
daaridrya naashanm daanm sheelm durgati naashnam.

Knowledge eliminates ignorance, and faith in one’s own capacity removes fear. Sharing wealth with the needy by way of donations and charity removes poverty in the society and good moral character and integrity wards off misfortune and penury.

(इससे पहले का सुभाषित – आलस्यं हि मुनष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः । नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वाSयं नाSवसीदति ॥ )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *